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mahabharat 13.154.d65-d66: धैर्यवान व्यक्ति को दूसरों से भीख नहीं माँगनी चाहिए। उसे अपनी शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए। उसे अपने खान-पान और आचरण में हमेशा अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए। उसे केवल वही भोजन करना चाहिए जो स्वास्थ्यवर्धक और लाभकारी हो तथा जो उचित मात्रा में और सही तरीके से पकाया गया हो।   |   mahabharat अध्याय 13.154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता  »  श्लोक d65-d66
 
 
श्लोक  13.154.d65-d66 
न याचेत परान् धीर: स्वबाहुबलमाश्रयेत्॥
स्वशरीरं सदा रक्षेदाहाराचारयोरपि।
हितं पथ्यं सदाहारं जीर्णं भुञ्जीत मात्रया॥
 
 
अनुवाद
धैर्यवान व्यक्ति को दूसरों से भीख नहीं माँगनी चाहिए। उसे अपनी शक्ति पर भरोसा रखना चाहिए। उसे अपने खान-पान और आचरण में हमेशा अपने शरीर का ध्यान रखना चाहिए। उसे केवल वही भोजन करना चाहिए जो स्वास्थ्यवर्धक और लाभकारी हो तथा जो उचित मात्रा में और सही तरीके से पकाया गया हो।
 
A patient man should not beg from others. He should trust his own strength. He should always take care of his body in his food and conduct. He should eat only that food which is healthy and beneficial and is cooked properly and in the prescribed quantity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)