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mahabharat 13.154.d64: अपने लाभ और ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रतिदिन बड़ों की सेवा करो। दूसरों से पूछे बिना उनका धन कभी मत लो।   |   mahabharat अध्याय 13.154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता  »  श्लोक d64
 
 
श्लोक  13.154.d64 
वृद्धसेवी भवेन्नित्यं हितार्थं ज्ञानकाङ्क्षया।
परार्थं नाहरेद् द्रव्यमनामन्त्र्य तु सर्वदा॥
 
 
अनुवाद
अपने लाभ और ज्ञान प्राप्ति के लिए प्रतिदिन बड़ों की सेवा करो। दूसरों से पूछे बिना उनका धन कभी मत लो।
 
For your own benefit and to gain knowledge, serve the elders daily. Never take other people's wealth without asking them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)