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भावयित्वा तदाऽऽत्मानं पूजनीय: सतामपि॥
कुलानुवृत्तं वृत्तं वा पूर्वमात्मा समाश्रयेत्।
अनुवाद
ईश्वर का चिंतन करने से मनुष्य सत्पुरुषों के लिए भी पूजनीय हो जाता है। आत्मा को पहले कुल-परम्परा से प्राप्त सत्कर्म का आश्रय लेना चाहिए।
By thinking about God, a man becomes worship-worthy even for the good men. The soul should first take refuge in the good conduct inherited from the family tradition.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥