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श्रीमहेश्वर उवाच
विद्या वार्ता च सेवा च कारुत्वं नाटॺता तथा।
इत्येते जीवनार्थाय मर्त्यानां विहिता: प्रिये॥
अनुवाद
श्री महेश्वर बोले- हे प्रिये! विद्या, वार्तालाप, सेवा, शिल्पकला और अभिनय- ये पाँच कर्म मनुष्य की जीविका के लिए बनाए गए हैं।
Shri Maheshwar said-Dear! Learning, conversation, service, craftsmanship and acting – these are the five activities created for the livelihood of human beings.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥