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mahabharat 13.154.d12: जो प्राणी जन्म लेता है, उसकी मृत्यु भी पहले से ही होती है। व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार सुख या दुःख मिलता है।   |   mahabharat अध्याय 13.154: अहिंसाकी और इन्द्रिय-संयमकी प्रशंसा तथा दैवकी प्रधानता   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.154.d12 
जायमानस्य जीवस्य मृत्यु: पूर्वं प्रजायते।
सुखं वा यदि वा दु:खं यथापूर्वं कृतं तु वा॥
 
 
अनुवाद
जो प्राणी जन्म लेता है, उसकी मृत्यु भी पहले से ही होती है। व्यक्ति को अपने पूर्वजन्म के कर्मों के अनुसार सुख या दुःख मिलता है।
 
The creature which is born, its death is already born. The person gets happiness or sorrow according to the deeds he has done in his previous life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)