Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.153.d18-d21: ऐसा राजा पाप और विपत्ति का भागी नहीं होता। जो राजा अपनी प्रजा की आय का छठा भाग उपयोग करता है, किन्तु धर्म या पराक्रम से अपने शत्रुओं या शत्रुओं से उनकी रक्षा नहीं करता तथा जो परदेशी राष्ट्र पर आक्रमण करने में सदैव अनिर्णायक रहता है, उस शक्तिहीन राजा का राज्य उसके शत्रुओं द्वारा नष्ट हो जाता है। | mahabharat अध्याय 13.153: संक्षेपसे राजधर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न च पापैर्न चानर्थैर्युज्यते स नराधिप:॥
षड्भागमुपयुुञ्जन् य: प्रजा राजा न रक्षति॥
स्वचक्रपरचक्राभ्यां धर्मैर्वा विक्रमेण वा।
निरुद्योगो नृपो यश्च परराष्ट्रविघातने॥
स्वराष्ट्रं निष्प्रतापस्य परचक्रेण हन्यते॥
अनुवाद
ऐसा राजा पाप और विपत्ति का भागी नहीं होता। जो राजा अपनी प्रजा की आय का छठा भाग उपयोग करता है, किन्तु धर्म या पराक्रम से अपने शत्रुओं या शत्रुओं से उनकी रक्षा नहीं करता तथा जो परदेशी राष्ट्र पर आक्रमण करने में सदैव अनिर्णायक रहता है, उस शक्तिहीन राजा का राज्य उसके शत्रुओं द्वारा नष्ट हो जाता है।
Such a king is not a part of sin and disaster. The king who uses one-sixth of the income of his subjects but does not protect them from his own enemies or enemies through Dharma or valour and who always remains indecisive in attacking another nation, the kingdom of that king who lacks power is destroyed by his enemies.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥