श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 153: संक्षेपसे राजधर्मका वर्णन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  13.153.d1 
श्रीमहेश्वर उवाच
सम्प्रहासश्च भृत्येषु न कर्तव्यो नराधिपै:।
लघुत्वं चैव प्राप्नोति आज्ञा चास्य निवर्तते॥
 
 
अनुवाद
श्री महादेव जी कहते हैं - देवी! राजाओं को अपने सेवकों के साथ परिहास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से वे छोटे हो जाते हैं और उनकी आज्ञा का पालन नहीं होता।
 
Shri Mahadev Ji says - Devi! Kings should not joke with their servants because by doing so they become small and their orders are not obeyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)