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mahabharat 13.152.d27: धर्म का उल्लंघन करने पर वह स्वयं ही मार डालता है और धर्म की रक्षा करने पर वह स्वयं ही रक्षा करता है; इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को, विशेषकर राजा को, धर्म का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.152: योद्धाओंके धर्मका वर्णन तथा रणयज्ञमें प्राणोत्सर्गकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.152.d27 
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षित:।
तस्माद् धर्मो न हन्तव्य: पार्थिवेन विशेषत:॥
 
 
अनुवाद
धर्म का उल्लंघन करने पर वह स्वयं ही मार डालता है और धर्म की रक्षा करने पर वह स्वयं ही रक्षा करता है; इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को, विशेषकर राजा को, धर्म का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
 
Dharma itself, if violated, kills and Dharma itself, if protected, protects; hence every person, especially the king, should not violate Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)