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mahabharat 13.152.d23: मारे गए योद्धा स्वर्ग में पूजे जाते हैं; किन्तु मारने वाले की प्रशंसा इसी लोक में होती है। अतः युद्ध में दोनों ही सुखी होते हैं - मारने वाला भी और मारा जाने वाला भी।   |   mahabharat अध्याय 13.152: योद्धाओंके धर्मका वर्णन तथा रणयज्ञमें प्राणोत्सर्गकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.152.d23 
स्वर्गे हता: प्रपूज्यन्ते हन्ता त्वत्रैव पूज्यते।
द्वावेतौ सुखमेधेते हन्ता यश्चैव हन्यते॥
 
 
अनुवाद
मारे गए योद्धा स्वर्ग में पूजे जाते हैं; किन्तु मारने वाले की प्रशंसा इसी लोक में होती है। अतः युद्ध में दोनों ही सुखी होते हैं - मारने वाला भी और मारा जाने वाला भी।
 
The slain warriors are worshipped in heaven; but the killer is praised in this world itself. Hence, both are happy in war- the one who kills and the one who is killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)