श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 151: राजधर्मका वर्णन  »  श्लोक d53
 
 
श्लोक  13.151.d53 
सर्वेषां सम्प्रियो भूत्वा मण्डलं सततं चरेत्।
शुभेष्वपि च कार्येषु न चैकान्त: समाचरेत्॥
 
 
अनुवाद
राजा को सभी का प्रिय होना चाहिए और अपने मंडल (देश के विभिन्न भागों) में सदैव विचरण करना चाहिए। शुभ कार्यों में भी उसे अकेले नहीं रहना चाहिए।
 
The king should be loved by all and should always roam in his Mandal (different parts of the country). He should not do anything alone even in auspicious works.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)