Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.151.d5-d6: श्री महेश्वर ने कहा- शुभेच्छा! अब मैं तुम्हें राजधर्म के विषय में बताता हूँ; क्योंकि संसार के सभी अच्छे-बुरे आचरण राजा के अधीन हैं। देवि! राज्य को महान तपस्या का फल माना जाता है। | mahabharat अध्याय 13.151: राजधर्मका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रीमहेश्वर उवाच
तदहं ते प्रवक्ष्यामि राजधर्मं शुभानने॥
राजायत्तं हि यत् सर्वं लोकवृत्तं शुभाशुभम्।
महतस्तपसो देवि फलं राज्यमिति स्मृतम्॥
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा- शुभेच्छा! अब मैं तुम्हें राजधर्म के विषय में बताता हूँ; क्योंकि संसार के सभी अच्छे-बुरे आचरण राजा के अधीन हैं। देवि! राज्य को महान तपस्या का फल माना जाता है।
Shri Maheshwar said- Shubhane! Now I will tell you about the kingly duties; because all the good and bad conduct of the world is under the control of the king. Devi! The kingdom is considered to be the result of a great penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥