श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 151: राजधर्मका वर्णन  »  श्लोक d36
 
 
श्लोक  13.151.d36 
गर्ह्यान् विगर्हयेदेव पूज्यान् सम्पूजयेत् तथा।
दण्ड्यांश्च दण्डयेद् देवि नात्र कार्या विचारणा॥
 
 
अनुवाद
देवि! राजा को चाहिए कि वह निंदनीय लोगों की ही निंदा करे, पूजनीय लोगों की पूजा करे और दण्डनीय अपराधियों को दण्ड दे। इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
 
Devi! The king should only condemn the condemnable people, worship the respectable people and punish the punishable criminals. There should be no second thoughts in this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)