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श्लोक 13.151.d23  |
आत्मरक्षा नरेन्द्रस्य प्रजारक्षार्थमिष्यते।
तस्मात् सततमात्मानं संरक्षेदप्रमादवान्॥ |
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| अनुवाद |
| राजा को अपनी प्रजा की रक्षा करने के लिए स्वयं की रक्षा करनी होती है; इसलिए उसे सदैव सतर्क रहना चाहिए तथा अपनी रक्षा करनी चाहिए। |
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| The king needs to protect himself in order to protect his subjects; therefore, he must always be cautious and protect himself. |
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