श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.150.8 
तत्र कामगुणै: सर्वै: समुपेतो मुदा युत:।
महाभोगो महाकोशो धनी भवति मानव:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य योनि में वह सभी सुंदर गुणों से युक्त और सुखी है। उसके पास भोगने के लिए बहुत सारी भौतिक वस्तुएँ हैं। उसका कोष भी विशाल है। वह पुरुष सभी प्रकार से धनी है ॥8॥
 
In the human form he is blessed with all the beautiful qualities and is happy. He has a lot of material things to enjoy. His treasure is also huge. That man is rich in all aspects. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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