Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.150.64: देवी! यह धर्मसागर पुण्यात्माओं को प्रिय और पापियों को अप्रिय है। मैंने यह सब तुम्हारे संदेह दूर करने के लिए विस्तारपूर्वक बताया है। | mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवी! यह धर्मसागर पुण्यात्माओं को प्रिय और पापियों को अप्रिय है। मैंने यह सब तुम्हारे संदेह दूर करने के लिए विस्तारपूर्वक बताया है।
Devi! This ocean of Dharma is dear to the virtuous and unpleasant to the sinful. I have explained all this in detail to clear your doubts.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि उमामहेश्वरसंवादे पञ्चचत्वारिंशदधिक शततमोऽध्याय:॥ १४५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें उमामहेश्वरसंवादविषयक एक सौ पैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १२०९ श्लोक मिलाकर कुल १२७३ श्लोक हैं, this chapter split into 17chapters, this and next 16)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥