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mahabharat 13.150.6: वहाँ दीर्घकाल तक निवास करते हुए, उत्तम सुखों का उपभोग करते हुए, वह नन्दना आदि वनों में दिव्य अप्सराओं के साथ आनन्दपूर्वक भोग करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.150.6 
तत्रोष्य सुचिरं कालं भुक्त्वा भोगाननुत्तमान्।
सहाप्सरोभिर्मुदितो रमते नन्दनादिषु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दीर्घकाल तक निवास करते हुए, उत्तम सुखों का उपभोग करते हुए, वह नन्दना आदि वनों में दिव्य अप्सराओं के साथ आनन्दपूर्वक भोग करता है।
 
Residing there for a long time, enjoying the finest pleasures, he happily enjoys the company of celestial nymphs in forests like Nandana etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)