श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.150.59 
व्रतवन्तो नरा: केचिच्छ्रद्धाधर्मपरायणा:।
अव्रता भ्रष्टनियमास्तथान्ये राक्षसोपमा:॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग व्रत रखते हैं, धर्मपरायण होते हैं, और कुछ लोग व्रत नहीं रखते, नियम तोड़ते हैं और राक्षस के समान होते हैं ॥59॥
 
Some people observe fasts, are devout and religious, while others do not observe fasts, break the rules and are like demons. ॥ 59॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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