श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  13.150.58 
उमोवाच
अपरे स्वल्पविज्ञाना धर्मविद्वेषिणो नरा:।
ब्राह्मणान् वेदविदुषो नेच्छन्ति परिसर्पितुम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
पार्वती ने पूछा - हे प्रभु! ऐसे और भी बहुत से लोग हैं जो अपनी अल्प बुद्धि के कारण धर्म से द्वेष रखते हैं। वे वेदों को जानने वाले ब्राह्मणों के पास जाना नहीं चाहते।
 
Parvati asked - O Lord! There are many other people who hate religion due to their limited intelligence. They do not want to go to the Brahmins who know the Vedas. 58.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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