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श्रीमहेश्वर उवाच
श्रेयांसं मार्गमन्विच्छन् सदा य: पृच्छति द्विजान्।
धर्मान्वेषी गुणाकांक्षी स स्वर्गं समुपाश्नुते॥ ५५॥
अनुवाद
श्री महेश्वर ने कहा - जो श्रेष्ठ मार्ग की इच्छा रखता है और सदैव ब्राह्मणों से उसके विषय में पूछता है, धर्म का अन्वेषण करता है और उत्तम गुणों की इच्छा रखता है, वही स्वर्ग के सुख का अनुभव करता है।
Sri Maheshwar said - He who desires to find the best path and always asks the Brahmins about it, explores the Dharma and desires good qualities, he alone experiences the happiness of heaven.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥