श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  13.150.52 
ये तु मूढा दुराचारा वियोनौ मैथुने रता:।
पुरुषेषु सुदुष्प्रज्ञा क्लीबत्वमुपयान्ति ते॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
जो दुष्ट, मूर्ख और दुष्ट पुरुष पशु आदि की योनि से मैथुन करते हैं, वे मनुष्यों में नपुंसक हैं।
 
Those wicked, foolish and evil men who have sexual intercourse with the vagina of animals etc., are impotent among men.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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