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mahabharat 13.150.51: जो पापी लोग अशुद्ध हृदय से नग्न स्त्री को देखते हैं, वे इस संसार में रोगों से पीड़ित होते हैं ॥ 51॥   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.150.51 
मनसा तु प्रदुष्टेन नग्नां पश्यन्ति ये स्त्रियम्।
रोगार्तास्ते भवन्तीह नरा दुष्कृतकर्मिण:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जो पापी लोग अशुद्ध हृदय से नग्न स्त्री को देखते हैं, वे इस संसार में रोगों से पीड़ित होते हैं ॥ 51॥
 
Those sinners who gaze at a naked woman with an impure heart, suffer from diseases in this world. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)