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श्लोक 13.150.51  |
मनसा तु प्रदुष्टेन नग्नां पश्यन्ति ये स्त्रियम्।
रोगार्तास्ते भवन्तीह नरा दुष्कृतकर्मिण:॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| जो पापी लोग अशुद्ध हृदय से नग्न स्त्री को देखते हैं, वे इस संसार में रोगों से पीड़ित होते हैं ॥ 51॥ |
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| Those sinners who gaze at a naked woman with an impure heart, suffer from diseases in this world. ॥ 51॥ |
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