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श्लोक 13.150.50  |
परदारेषु ये चापि चक्षुर्दुष्टं प्रयुञ्जते।
तेन दुष्टस्वभावेन जात्यन्धास्ते भवन्ति ह॥ ५०॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य पराई स्त्रियों को सदैव दोषी दृष्टि से देखते हैं, वे उस दुष्ट स्वभाव के कारण जन्म से ही अंधे हो जाते हैं। |
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| Those who always look with a guilty eye upon other's women, become blind from birth because of that evil nature. |
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