Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.150.50: जो मनुष्य पराई स्त्रियों को सदैव दोषी दृष्टि से देखते हैं, वे उस दुष्ट स्वभाव के कारण जन्म से ही अंधे हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.150.50 
परदारेषु ये चापि चक्षुर्दुष्टं प्रयुञ्जते।
तेन दुष्टस्वभावेन जात्यन्धास्ते भवन्ति ह॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य पराई स्त्रियों को सदैव दोषी दृष्टि से देखते हैं, वे उस दुष्ट स्वभाव के कारण जन्म से ही अंधे हो जाते हैं।
 
Those who always look with a guilty eye upon other's women, become blind from birth because of that evil nature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)