श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.150.49 
स चेन्मानुषतां याति मेधावी तत्र जायते।
श्रुतं प्रज्ञानुगं यस्य कल्याणमुपजायते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
यदि ऐसा आचरण करने वाला मनुष्य स्वर्ग से लौटकर पुनः मनुष्य योनि में जन्म लेता है, तो वह बुद्धिमान हो जाता है। शास्त्र उसकी बुद्धि का अनुसरण करते हैं, अतः उसका सदैव कल्याण होता है ॥ 49॥
 
If a man with such conduct returns from heaven and is again born as a human being, he becomes intelligent. The scriptures follow his wisdom, and hence he is always blessed with welfare. ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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