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श्लोक 13.150.45  |
अल्पप्रज्ञो विरूपाक्ष कथं भवति मानव:।
एतन्मे संशयं छिन्धि सर्वधर्मविदां वर॥ ४५॥ |
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| अनुवाद |
| विरुपाक्ष! मनुष्य मंदबुद्धि कैसे हो जाता है? महादेव समस्त धर्मात्माओं में श्रेष्ठ हैं! कृपया मेरे इस संदेह का निवारण करें॥45॥ |
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| Virupaksha! How does a person become retarded? Mahadev is the best among all the religious people! Please clear this doubt of mine. 45॥ |
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