श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  13.150.44 
दुष्प्रज्ञाश्चापरे देव ज्ञानविज्ञानवर्जिता:।
केन कर्मविशेषेण प्रज्ञावान् पुरुषो भवेत्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! कुछ अन्य मनुष्य विद्या और बुद्धि से रहित और कुबुद्धि वाले प्रतीत होते हैं। ऐसी स्थिति में मनुष्य कौन-सा विशेष कर्म कर बुद्धिमान बन सकता है?॥ 44॥
 
O Lord! Some other human beings appear to be devoid of knowledge and wisdom and have bad intellect. In such a condition, what special action can a human being perform to become intelligent?॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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