Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.150.35: यदि कालचक्र के घूमने से वह पुनः मनुष्य योनि में आता है, तो उसे नीच कुल में जन्म मिलता है और अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाओं को सहना पड़ता है ॥35॥ | mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स वै मनुष्यतां गच्छेद् यदि कालस्य पर्ययात्।
बह्वाबाधपरिक्लिष्टे जायते सोऽधमे कुले॥ ३५॥
अनुवाद
यदि कालचक्र के घूमने से वह पुनः मनुष्य योनि में आता है, तो उसे नीच कुल में जन्म मिलता है और अनेक प्रकार की विघ्न-बाधाओं को सहना पड़ता है ॥35॥
If, through the turn of the wheel of time, he again comes into human form, he is born in a lowly family, having to suffer from many kinds of obstacles. ॥ 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥