श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.150.31 
उदात्तकुलजातीय उदात्ताभिजन: सदा।
एष धर्मो मया प्रोक्तो विधात्रा स्वयमीरित:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्मा पुरुष सदैव उत्तम कुल, उत्तम जाति और उत्तम स्थान में जन्म लेता है। मैंने ब्रह्माजी के कहे अनुसार इस धर्म का वर्णन किया है। 31॥
 
A virtuous person is always born in a good family, a good caste and a good place. I have described this religion as told by Lord Brahma. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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