श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  13.150.30 
सम्मत: सर्वभूतानां सर्वलोकनमस्कृत:।
स्वकर्मफलमाप्नोति स्वयमेव नर: सदा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ सभी प्राणी उसका आदर करते हैं और सभी लोग उसके चरणों में झुकते हैं। इस प्रकार मनुष्य सदैव अपने ही कर्मों का फल भोगता है ॥30॥
 
There all creatures respect him and all people bow down before him. In this way man always reaps the fruits of his own actions. ॥ 30॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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