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mahabharat 13.150.29: उस जन्म में वह महान भोगों और समस्त रत्नों से युक्त होता है, योग्य ब्राह्मणों को यथायोग्य दान देता है और धार्मिक अनुष्ठानों में तत्पर रहता है ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 13.150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.150.29 
तत्रासौ विपुलैर्भोगै: सर्वरत्नसमायुत:।
यथार्हदाता चार्हेषु धर्मचर्यापरो भवेत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
उस जन्म में वह महान भोगों और समस्त रत्नों से युक्त होता है, योग्य ब्राह्मणों को यथायोग्य दान देता है और धार्मिक अनुष्ठानों में तत्पर रहता है ॥29॥
 
In that birth, he is blessed with great enjoyments and all the gems, gives as much charity as he deserves to deserving Brahmins and remains active in performing religious rituals. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)