श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.150.19 
अर्घ्यार्हान् न च सत्कारैरर्चयन्ति यथाविधि।
अर्घ्यमाचमनीयं वा न यच्छन्त्यल्पबुद्धय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इतना ही नहीं, वे अर्घ्य देने योग्य माननीय पुरुषों की भी विधिपूर्वक नाना प्रकार के पूजनीय कर्म करके पूजा नहीं करते, अथवा ये मूर्ख लोग उन्हें अर्घ्य या आचमन नहीं देते॥19॥
 
Not only this, they do not worship the honourable persons who are worthy of being offered arghya by performing various types of honourable acts in a proper manner, or these foolish people do not offer arghya or aachamniya to them.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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