श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.150.16 
अल्पभोगकुले जाता अल्पभोगरता नरा:।
अनेन कर्मणा देवि भवन्त्यधनिनो नरा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवि! इन पाप कर्मों के कारण मनुष्य अल्प भोग वाले कुल में जन्म लेता है, थोड़े से सुखों का ही भोग करता है और सदा दरिद्र रहता है ॥16॥
 
Devi! Due to these sinful deeds, a man is born in a family where there is little enjoyment; he enjoys only a few pleasures and remains poor forever. ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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