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श्लोक 13.150.16  |
अल्पभोगकुले जाता अल्पभोगरता नरा:।
अनेन कर्मणा देवि भवन्त्यधनिनो नरा:॥ १६॥ |
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| अनुवाद |
| देवि! इन पाप कर्मों के कारण मनुष्य अल्प भोग वाले कुल में जन्म लेता है, थोड़े से सुखों का ही भोग करता है और सदा दरिद्र रहता है ॥16॥ |
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| Devi! Due to these sinful deeds, a man is born in a family where there is little enjoyment; he enjoys only a few pleasures and remains poor forever. ॥ 16॥ |
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