श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.150.15 
क्षुत्पिपासापरीताश्च सर्वलोकबहिष्कृता:।
निराशा: सर्वभोगेभ्यो जीवन्त्यधर्मजीविकाम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वहाँ वे सदैव भूख-प्यास से पीड़ित रहते हैं। सब लोग उनका बहिष्कार करते हैं और सब प्रकार के सुखों से विरक्त होकर वे पापकर्मों से जीविका चलाते हैं॥15॥
 
There they always suffer from hunger and thirst. Everyone ostracises them and being disillusioned with all kinds of pleasures they earn their living by sinful acts.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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