श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 150: स्वर्ग और नरक तथा उत्तम और अधम कुलमें जन्मकी प्राप्ति करानेवाले कर्मोंका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.150.10 
अपरे मानवा देवि प्रदानकृपणा द्विजै:।
याचिता न प्रयच्छन्ति विद्यमानेऽप्यबुद्धय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
देवी! अन्य लोग भी दान देने में कंजूसी करते हैं। ये मंदबुद्धि लोग धन होते हुए भी ब्राह्मणों के मांगने पर उन्हें कुछ नहीं देते।॥10॥
 
Devi! Many other people are miserly in giving donations. These dull-witted people do not give anything to the Brahmins when they ask for it, even though they have money.॥ 10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd