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श्लोक 13.15.99  |
विकर्णश्च महादेवं तथा भक्तसुखावहम्।
प्रसाद्य भगवान् सिद्धिं प्राप्तवान् मधुसूदन॥ ९९॥ |
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| अनुवाद |
| मधुसूदन! ऐश्वर्यशाली विकर्ण ने भक्तों को प्रसन्न करने वाले महादेवजी को प्रसन्न करके अपनी अभीष्ट सिद्धि प्राप्त कर ली थी ॥99॥ |
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| Madhusudan! The opulent Vikarna had achieved his desired success by pleasing Mahadevji, the pleaser of the devotees. 99॥ |
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