श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 97-98
 
 
श्लोक  13.15.97-98 
तामब्रवीद्धसन् देवो भविता वै सुतस्तव॥ ९७॥
विना भर्त्रा च रुद्रेण भविष्यति न संशय:।
वंशे तवैव नाम्ना तु ख्यातिं यास्यति चेप्सिताम्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
तब महादेवजी ने हँसकर उनसे कहा - 'देवि! मेरी कृपा से यज्ञसम्बन्धी चारुक द्रव्य पीने मात्र से ही तुम्हें पति की सहायता के बिना ही पुत्र प्राप्त होगा - इसमें संशय नहीं है। वह अपनी इच्छानुसार तुम्हारे नाम से तुम्हारे वंश में यश प्राप्त करेगा।' 97-98॥
 
Then Mahadevji laughingly said to her - 'Devi! By my grace, just by drinking the Charuka liquid related to the Yagya, you will get a son without the help of your husband – there is no doubt about it. He will get fame in your lineage in your name as per his wish. 97-98॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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