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mahabharat 13.15.91-92h: कहा जाता है कि पूर्वकाल में इंद्र ने बालखिल्य नामक दो ऋषियों का अपमान किया था। क्रोधित होकर ऋषियों ने तपस्या की और भगवान रुद्र को प्रसन्न किया।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 91-92h
 
 
श्लोक  13.15.91-92h 
बालखिल्या मघवता ह्यवज्ञाता: पुरा किल॥ ९१॥
तै: क्रुद्धैर्भगवान‍् रुद्रस्तपसा तोषितो ह्यभूत्।
 
 
अनुवाद
कहा जाता है कि पूर्वकाल में इंद्र ने बालखिल्य नामक दो ऋषियों का अपमान किया था। क्रोधित होकर ऋषियों ने तपस्या की और भगवान रुद्र को प्रसन्न किया।
 
It is said that sometime in the past Indra had insulted two sages named Balakhilya. Enraged, the sages performed penance and thereby satisfied Lord Rudra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)