श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 90-91h
 
 
श्लोक  13.15.90-91h 
वेदव्यासश्च योगात्मा पराशरसुतो मुनि:॥ ९०॥
सोऽपि शङ्करमाराध्य प्राप्तवानतुलं यश:।
 
 
अनुवाद
पराशर के पुत्र ऋषि वेदव्यास योग के साक्षात स्वरूप हैं। उन्होंने भी शंकरजी की आराधना करके अतुलनीय यश प्राप्त किया।
 
Parashar's son, sage Vedavyasa is the very embodiment of Yoga. He too, by worshipping Shankarji, achieved great fame which has no comparison.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas