श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 89-90h
 
 
श्लोक  13.15.89-90h 
योगेश्वरं देवगीतं वेत्थ कृष्ण न संशय:।
याज्ञवल्क्य इति ख्यात ऋषि: परमधार्मिक:॥ ८९॥
आराध्य स महादेवं प्राप्तवानतुलं यश:।
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! इसमें कोई संदेह नहीं कि आप उन योगेश्वर शिव को भली-भाँति जानते हैं, जिनकी महिमा देवता लोग गाते हैं। याज्ञवल्क्य नामक प्रसिद्ध परम पुण्यशाली ऋषि ने महादेवजी की आराधना करके अतुलनीय यश प्राप्त किया था। 89 1/2॥
 
Sri Krishna! There is no doubt that you know very well that Yogeshwar Shiva, whose glory the gods sing. The famous supremely virtuous sage named Yajnavalkya attained incomparable fame by worshiping Mahadevji. 89 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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