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mahabharat 13.15.87-88: उसके वचन सुनकर शक्तिमान भगवान ने 'तथास्तु' कहकर उसे स्वीकार कर लिया। इसी प्रकार पूर्वकाल में स्वयंभू के पुत्र क्रतु ने पुत्र प्राप्ति हेतु तीन सौ वर्षों तक योग के द्वारा भगवान शिव का ध्यान किया था; अतः भगवान शंकर ने क्रतु को भी उसके समान एक हजार पुत्र प्रदान किए। 87-88।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 87-88
 
 
श्लोक  13.15.87-88 
तथेति भगवानाह तस्य तद् वचनं प्रभु:।
स्वायम्भुव: क्रतुश्चापि पुत्रार्थमभवत् पुरा॥ ८७॥
आविश्य योगेनात्मानं त्रीणि वर्षशतान्यपि।
तस्य चोपददौ पुत्रान् सहस्रं क्रतुसम्मितान्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
उसके वचन सुनकर शक्तिमान भगवान ने 'तथास्तु' कहकर उसे स्वीकार कर लिया। इसी प्रकार पूर्वकाल में स्वयंभू के पुत्र क्रतु ने पुत्र प्राप्ति हेतु तीन सौ वर्षों तक योग के द्वारा भगवान शिव का ध्यान किया था; अतः भगवान शंकर ने क्रतु को भी उसके समान एक हजार पुत्र प्रदान किए। 87-88।
 
Hearing his words, the powerful Lord accepted them by saying 'Tathastu'. Similarly, in the past, Svayambhu's son Kratu had engaged himself in the meditation of Lord Shiva through yoga for three hundred years to get a son; hence Lord Shankar gave a thousand sons like him to Kratu also. 87-88.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)