| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन » श्लोक 85-86 |
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| | | | श्लोक 13.15.85-86  | तं प्राह भगवांस्तुष्ट: किं करोमीति शंकर:॥ ८५॥
तं वै शतमुख: प्राह योगो भवतु मेऽद्भुत:।
बलं च दैवतश्रेष्ठ शाश्वतं सम्प्रयच्छ मे॥ ८६॥ | | | | | | अनुवाद | | इससे संतुष्ट होकर भगवान शंकर ने पूछा, ‘बताइए, मैं आपकी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ?’ तब शतमुख ने उनसे कहा, ‘हे देवश्रेष्ठ! मुझे अद्भुत योगशक्ति प्राप्त हो। साथ ही, मुझे चिरस्थायी शक्ति भी प्रदान करें।’ | | | | Being satisfied with that, Lord Shankar asked, 'Tell me, which of your wishes should I fulfill?' Then Shatamukh said to him, 'O best of the gods! May I get amazing yogic powers. Also, please give me strength that lasts forever.' | | ✨ ai-generated | | |
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