श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  13.15.81 
अर्द्यमानाश्च विबुधा ग्रहेण सुबलीयसा।
शिवदत्तवरान् जघ्नुरसुरेन्द्रान् सुरा भृशम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
जब वह बलवान ग्रह देवताओं को सताने लगा, तब देवताओं ने भी भगवान शंकर से वरदान पाकर उन दैत्यों को बहुत बुरी तरह पीटा। (इस प्रकार उन दोनों में बहुत समय तक युद्ध चलता रहा।)॥81॥
 
When that powerful planet started harassing the gods, then the gods too, having received boons from Lord Shankar, beat those demons very badly. (This way the war between them continued for a long time.)॥ 81॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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