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mahabharat 13.15.80: उसे भगवान शंकर से वरदान प्राप्त था। उस अत्यंत शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणी के लिए चक्र और वज्र जैसे सैकड़ों अस्त्र भी किसी काम के नहीं थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  13.15.80 
ग्रहस्यातिबलस्याङ्गे वरदत्तस्य धीमत:।
न शस्त्राण वहन्त्यङ्गे चक्रवज्रशतान्यपि॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
उसे भगवान शंकर से वरदान प्राप्त था। उस अत्यंत शक्तिशाली और बुद्धिमान प्राणी के लिए चक्र और वज्र जैसे सैकड़ों अस्त्र भी किसी काम के नहीं थे।
 
He had received a boon from Lord Shankar. Even hundreds of weapons like chakras and vajras were of no use to that extremely powerful and intelligent being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)