श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  13.15.73 
हिरण्यकशिपुर्योऽभूद् दानवो मेरुकम्पन:।
तेन सर्वामरैश्वर्यं शर्वात् प्राप्तं समार्बुदम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में हिरण्यकशिपु नामक दैत्य ने, जो मेरु पर्वत को भी कंपा देने में समर्थ था, भगवान शंकर से एक अर्बुद (दस करोड़) वर्ष तक समस्त देवताओं का ऐश्वर्य प्राप्त कर लिया था।
 
Earlier, the demon named Hiranyakashipu, who was capable of making even Mount Meru tremble, had received from Lord Shankar the prosperity of all the gods for one Arbuda (10 crore) years.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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