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mahabharat 13.15.69: अधोक्षज! तुम्हें घोर तपस्या करके सबके स्वामी भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहिए। यहाँ महादेवजी अपनी पत्नी भगवती उमा के साथ क्रीड़ा कर रहे हैं। 69।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  13.15.69 
तप: सुमहदास्थाय तोषयेशानमीश्वरम्।
इह देव: सपत्नीक: समाक्रीडत्यधोक्षज॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
अधोक्षज! तुम्हें घोर तपस्या करके सबके स्वामी भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहिए। यहाँ महादेवजी अपनी पत्नी भगवती उमा के साथ क्रीड़ा कर रहे हैं। 69।
 
Adhokshaja! You should please Lord Shiva, the lord of all, by resorting to great penance. Here Mahadevji plays with his wife Bhagwati Uma. 69.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)