Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.62-64: जिस महान आश्रम में वेदों को जानने वाले श्रेष्ठ ब्राह्मणों का निवास था और जिसकी शोभा बढ़ाने के लिए नाना प्रकार के नियमों से विख्यात महात्मा महर्षि अनेक प्रकार से विहार करते थे, जो समस्त प्राणियों के लिए सुखदायक था, उस आश्रम में प्रवेश करते ही मैंने सुवर्णमय केशों वाले, तप के कारण अग्नि के समान तेजस्वी, शान्त और तरुण ब्राह्मण उपमन्यु को अपने शिष्यों से घिरे हुए बैठे देखा ॥62-64॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिस महान आश्रम में वेदों को जानने वाले श्रेष्ठ ब्राह्मणों का निवास था और जिसकी शोभा बढ़ाने के लिए नाना प्रकार के नियमों से विख्यात महात्मा महर्षि अनेक प्रकार से विहार करते थे, जो समस्त प्राणियों के लिए सुखदायक था, उस आश्रम में प्रवेश करते ही मैंने सुवर्णमय केशों वाले, तप के कारण अग्नि के समान तेजस्वी, शान्त और तरुण ब्राह्मण उपमन्यु को अपने शिष्यों से घिरे हुए बैठे देखा ॥62-64॥
As soon as I entered that great ashram, which was consumed by the best Brahmins who were well-versed in the Vedas and which the Mahatma Maharshi, who became famous by various rules, used to enhance its beauty, which was a delight for all living beings, I saw Upamanyu, the Brahmin with the golden hair, impressive, bright and glowing like fire due to his penance, peaceful and youthful, sitting surrounded by his disciples. 62-64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥