श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.15.60 
सुपूजितं देवगणैर्महात्मभि:
शिवादिभिर्भारत पुण्यकर्मभि:।
रराज तच्चाश्रममण्डलं सदा
दिवीव राजन् शशिमण्डलं यथा॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
हे भरतवंशी राजा! महात्मा और पुण्यशाली शिवजी के समान देवताओं से युक्त वह आश्रममण्डल सदैव आकाश में चन्द्रमा के समान शोभा पाता था॥60॥
 
Bharatvanshi king! That Ashram Mandal, blessed with the deities like Mahatma and virtuous Shiva, always used to be as beautiful as the Moon in the sky. 60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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