श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  13.15.58 
अश्वत्थफलभक्षाश्च तथा ह्युदकशायिन:।
चीरचर्माम्बरधरास्तथा वल्कलधारिण:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग पीपल के फल खाकर जीवन निर्वाह करते थे, कुछ लोग जल में सोते थे और कुछ लोग वस्त्र, छाल और मृगचर्म धारण करते थे।
 
Some lived by eating the fruits of the Peepal tree, some slept in water and some wore cloth, bark and deerskin. 58.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas