Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.55: नरेश्वर! पुण्यवती जाह्नवी उस क्षेत्र की शोभा को सदैव बढ़ाती रहती थीं, मानो उन्हें उसमें आनन्द आता हो। वह स्थान अग्नि के समान तेजस्वी और धर्मात्माओं में श्रेष्ठ अनेक महात्माओं से सुशोभित था। 55॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विभूषितं पुण्यपवित्रतोयया
सदा च जुष्टं नृप जह्नुकन्यया।
विभूषितं धर्मभृतां वरिष्ठै-
र्महात्मभिर्वह्निसमानकल्पै: ॥ ५५॥
अनुवाद
नरेश्वर! पुण्यवती जाह्नवी उस क्षेत्र की शोभा को सदैव बढ़ाती रहती थीं, मानो उन्हें उसमें आनन्द आता हो। वह स्थान अग्नि के समान तेजस्वी और धर्मात्माओं में श्रेष्ठ अनेक महात्माओं से सुशोभित था। 55॥
Nareshwar! The virtuous Jhanvi always enhanced the beauty of that area as if she enjoyed it. That place was adorned with many Mahatmas who were as bright as fire and the best among religious souls. 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥