Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.54: वह पर्वतीय प्रदेश, जिसकी कल्पना भी अन्य लोग नहीं कर सकते, ऐसी अकल्पनीय सुन्दरता से युक्त था, तथा अनेक सरोवरों और पुष्पों से आच्छादित विशाल अग्निकुण्डों से सुशोभित था ॥ 54॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह पर्वतीय प्रदेश, जिसकी कल्पना भी अन्य लोग नहीं कर सकते, ऐसी अकल्पनीय सुन्दरता से युक्त था, तथा अनेक सरोवरों और पुष्पों से आच्छादित विशाल अग्निकुण्डों से सुशोभित था ॥ 54॥
That mountainous region, endowed with such inconceivable beauty that other people cannot even imagine, was adorned with numerous lakes and huge fire-pits covered with flowers. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥