Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.53: वीर! पर्वत शिखरों से गिरते हुए झरनों की ध्वनि, पक्षियों का सुन्दर कलरव, हाथियों का गरजना, किन्नरों का मधुर गान और सामवेदी विद्वानों के सामगान गाने वाले मंगलमय वचन उस वन प्रदेश को संगीतमय बना रहे थे॥53॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.15.53 
धारानिनादैर्विहगप्रणादै:
शुभैस्तथा बृंहितै: कुञ्जराणाम्।
गीतैस्तथा किन्नराणामुदारै:
शुभै: स्वनै: सामगानां च वीर॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
वीर! पर्वत शिखरों से गिरते हुए झरनों की ध्वनि, पक्षियों का सुन्दर कलरव, हाथियों का गरजना, किन्नरों का मधुर गान और सामवेदी विद्वानों के सामगान गाने वाले मंगलमय वचन उस वन प्रदेश को संगीतमय बना रहे थे॥53॥
 
Brave! The sound of the waterfalls cascading from the mountain peaks, the beautiful chirping of the birds, the roaring of the elephants, the generous songs of the Kinnaras and the auspicious words of the Samavedi scholars singing Sama-Gaanas were making that forest region musical. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)